डे वन। दिमाग की आवाज और माइंड का भ्रम। आज हम एक ऐसी जर्नी शुरू कर रहे हैं जहाँ हम सबसे पहले अपने सबसे बड़े इल्यूजन को तोड़ेंगे, हमारा अपना दिमाग। एकहार्ट टोल और माइकल सिंगर दोनों इस बात पर पूरी तरह एग्री करते हैं कि आपकी स्पिरिचुअल ग्रोथ और इनर पीस का सबसे बड़ा ऑब्स्टेकल, आपके अपने दिमाग और उसकी आवाज के साथ खुद को जोड़ना है।
अब बात करते हैं एक कहानी की, जिसे एकहार्ट टोल शेयर करते हैं। एक भिखारी तीस साल से एक पुराने बक्से पर बैठा भीख माँग रहा था। एक दिन एक अजनबी वहाँ से गुजरा और उसने भिखारी को अपने बक्से के अंदर झाँकने को कहा। जब भिखारी ने बक्सा खोला, तो वो सोने से भरा हुआ था। टोल समझाते हैं कि हम सब उस भिखारी की तरह ही हैं। हम बाहर की दुनिया में वैलिडेशन, सिक्योरिटी, और प्यार ढूँढ रहे हैं, जबकि सचमुच जिंदा होने की खुशी और ना हिलने वाली शांति का खजाना पहले से ही हमारे अंदर मौजूद है।
माइकल सिंगर बताते हैं कि आपके अंदर एक आवाज है जो कभी चुप नहीं होती, जो लगातार बोलती रहती है। जैसे, शूट, मैं उसका नाम भूल गया, क्या नाम है उसका? यह आवाज दोनों साइड्स से आपस में बहस करती है, और इसको इस बात से कोई मतलब नहीं होता कि कौन सी साइड जीत रही है, इसको बस लगातार बोलते रहना है। हम इस दिमागी शोर को इतना नॉर्मल मान लेते हैं कि हमें लगता है कि यह आवाज ही हमारी आइडेंटिटी है। टोल पॉइंट आउट करते हैं कि फिलॉसफर डेकार्ट का फेमस स्टेटमेंट, आई थिंक, देयरफॉर आई एम, यानी, मैं सोचता हूँ, इसलिए मैं हूँ, दरअसल एक बुनियादी गलती थी, क्योंकि उन्होंने सोचने को अपने वजूद के बराबर मान लिया था। यह आवाज आपका कंडीशन्ड माइंड है, जो पास्ट हिस्ट्री और कल्चर से बना दिमाग है, जो प्रेजेंट को हमेशा पास्ट के चश्मे से देखता है।
आपका दिमाग हर वक्त आपके आस-पास की दुनिया को नैरेट क्यों करता है? सिंगर समझाते हैं कि जब आप ठंड में चल रहे होते हैं, तो दिमाग बोलता है, इट्स कोल्ड, जबकि आपकी बॉडी पहले ही ठंड फील कर रही होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आउटर वर्ल्ड पर आपका कोई कंट्रोल नहीं होता, और वो अपने नेचुरल लॉज के हिसाब से चलता है। दिमाग इन एक्सपीरियंसेज को वर्ड्स में कंवर्ट करके रियल्टी को फ़िल्टर करता है, जिससे आपको नियंत्रण का एक आभास मिलता है। दुनिया को मेंटली मैनिप्युलेट करके आप अपने आपको सिक्योर फील करवाने की कोशिश करते हैं।
तो इसका सोल्यूशन क्या है? आप वो आवाज नहीं हैं, आप वो हैं जो उस आवाज को सुनता है। टोल इस प्रैक्टिस को वॉचिंग द थिंकर, यानी सोचने वाले को देखना कहते हैं। जब आप अपने दिमाग में चलने वाले रिपीटिटिव थॉट पैटर्न्स को बिना किसी जजमेंट के सुनते हैं, तो आप थॉट्स को अपनी एनर्जी देना बंद कर देते हैं। आपको रियलाइज होगा कि इंटेलिजेंस, लव, और जॉय दिमाग से नहीं, बल्कि उसके आगे के एक विशाल क्षेत्र से आते हैं। अगर आप अपने दिमाग को, शट अप, बोल कर चुप कराना चाहेंगे, तो आप नोटिस करेंगे कि यह वही आवाज है जो खुद पर चिल्ला रही है। इसलिए लड़ने के बजाय, बस एक गवाह बन कर इस आवाज को ऑब्जर्व करें।
हमें हमेशा तीन बातें याद रखनी चाहिए। पहली, आप दिमाग में चलने वाली बातें नहीं हैं, आप उन बातों को सुनने वाले विटनेस हैं। दूसरी, दिमाग सिर्फ एक औजार है जिसका काम दुनिया को आपके कम्फर्ट के हिसाब से फ़िल्टर करना है। और तीसरी, बाहरी दुनिया में खुशी ढूँढना बंद करें, आपका असली खजाना आपके अंदर ही है।
अब आते हैं आज के एक प्रैक्टिकल फील्ड टेस्ट पर। आज जब आप शॉवर लेंगे, तो अपना ध्यान सिर्फ उस मेंटल आवाज पर लगाएँ जो आपके दिमाग में चल रही है। आप देखेंगे कि शॉवर का एक्चुअल पर्पज बॉडी धोना है, पर आपका दिमाग एक टॉपिक से दूसरे टॉपिक पर जम्प कर रहा होगा, कंटीन्यूअसली बातें करता हुआ। आपका टास्क उस आवाज को चुप कराना नहीं है, और न ही उससे बहस करनी है। बस शॉवर लेते वक्त ध्यान दें कि, मैं यहाँ अंदर बैठकर इस आवाज को ऑब्जर्व कर रहा हूँ। जब आप बिना उसमें उलझे उस परेशान करने वाली आवाज को देख पाएँगे, तो आप एक नए लेवल की कॉन्शियस अवेयरनेस को एक्सपीरियंस क
रेंगे।